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सुप्रभात शायरी

सुप्रभात | suprabhat shayari, subah ki shayari, सुबह की शायरी, सुप्रभात शायरी

subah hui to bujha diya

उन्होनें भी हमें बस एक दिए की तरह समझा

रात गहरी हुयी तो जला दिया सुबह हुयी तो बुझा दिया

subah hui to bujha diya

ye mat sochna

ये मत सोचना की तुमने छोड़  दिया तो टूट  गए हम

वो भी जी रहे हैं जिनको तेरी खातिर  छोड़ा था हमने

ye mat sochna

kaise hifazat karta

मैं चिरागों की भला कैसे हिफाज़त करता

वक़्त सूरज को भी, हर रोज़ बुझा देता है

kaise hifazat karta

kehne ko zindagi

कहने को ज़िन्दगी है मगर इसमें ज़िन्दगी वाली बात नही

भीड़ में शामिल हर कोई है, पर कोई किसी के साथ नही

kehne ko zindagi

chalo accha huaa

चलो अच्छा हुआ भ्रम टूट गया मेरा..

बहुत उम्मीदें लगा ली थी मैंने मोहब्बत से उनकी

chalo accha huaa