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Waqt shayari

Waqt shayari | वक्त पर शायरी | Waqt shayariin Hindi | shayari on waqt 



waqt kharch na karo

पैसा कमाने के लिए इतना वक़्त खर्च ना करो की
पैसा खर्च करने के लिए ज़िन्दगी में वक़्त ही न मिले
waqt kharch na karo

Waqt janta hai

बख्शे हम भी न गए बख्शे तुम भी न जाओगे
वक्त जानता है हर चेहरे को बेनकाब करना.

jab dil pe chha rahi hai

जब दिल पे छा रही हों घटाएँ मलाल की,

उस वक़्त अपने दिल की तरफ़ मुस्कुरा के देख 

waqt ki dard

जिन किताबों पे सलीक़े से जमी वक़्त की गर्द

उन किताबों ही में यादों के ख़ज़ाने निकले

waqt meri tabahi pe hasta raha

वक़्त मेरी तबाही पे हँसता रहा

रंग तकदीर क्या क्या बदलती रही

waqt meri tabahi pe hasta raha

kal mila waqt to

कल मिला वक़्त तो ज़ुल्फ़ें तेरी सुलझा लूंगा

आज उलझा हूँ ज़रा वक़्त के सुलझाने में

kal mila waqt to

pal bhar me

यूँ तो पल भर में सुलझ जाती है उलझी ज़ुल्फ़ें

उम्र कट जाती है पर वक़्त के सुलझाने में

pal bhar me

yhi waqt hai

सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का,

यही तो वक़्त है सूरज तेरे निकलने का

ae dil

ऐ दिल की ख़लिश चल यूँ ही सहीं

चलता तो हूँ उन की महफ़िल में

उस वक़्त मुझे चौंका देना

जब रँग में महफ़िल आ जाए

khamoosh huy jati hai

वो ख़लिश जिस से था हंगामा-ए-हस्ती बरपा

वक़्त-ए-बेताबी-ए-ख़ामोश हुई जाती है