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Zakhmi dil shayari

Zakhmi dil shayari | टूटे दिल की शायरी

naraz kyu hote ho

naraz kyu hote ho
नाराज़ क्यों होते हो चले जाएंगे तुम्हारी ज़िन्दगी से दूर
जरा टूटे दुए दिल के टुकड़े उठा लेने दो
zakhmi dil shayari, टूटे दिल की शायरी

har bar aate the

har bar aate the

कभी उनके नाम के पहले हर बार आते थे

पर अब आलम ये हैं कि उनके सपनो में भी नहीं आते

jala raha hai mujhe

jala raha hai mujhe

ये क्या सितम  है‍,क्यूं रात भर सिसकता है

वो कौन है जो "दियों" में जला रहा है मुझे

log saboot mangte

log saboot mangte

अंदर से तो कब के मर चुके है हम,

ए मौत तू भी आजा लोग सबूत मांगते है

dil ka dard

dil ka dard

जब कोई ख्वाब अधुरा रह जाते हैं !

तब दिल के दर्द आंसु बनकर बाहर आते हैं