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Khwahish shayari

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use kishmat smjh kar

उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया
था, भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती
use kishmat smjh kar

Uski khwahish

मेरे टूटने की वजह मेरे जोहरी से पूछो....

उस की ख्वाहिश थी कि मुझे थोडा और

तराशा जाये.!!

hum itne gareeb nahi

तुम आरजू तो करो मोहब्बत करने की 

हम इतने भी गरीब नहीं की मोहब्बत ना दे सके

hum itne gareeb nahi

Khwahish ye nahin

ख़्वाहिश ये नहीं की तारीफ़ हर कोई करे......

कोशिश ये ज़रूर है की कोई बुरा ना कहे.....

Ye kaisi khwahish hai

ये कैसी ख्वाहिश है कि मिटती ही नहीं..

जी भर के तुझे देख लिया फिर भी नजर हटती नहीं..