Poetry Tadka

Khwahish shayari

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उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया
था, भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती

use kishmat smjh kar

use kishmat smjh kar

मेरे टूटने की वजह मेरे जोहरी से पूछो....

उस की ख्वाहिश थी कि मुझे थोडा और

तराशा जाये.!!

Uski khwahish

तुम आरजू तो करो मोहब्बत करने की 

हम इतने भी गरीब नहीं की मोहब्बत ना दे सके

hum itne gareeb nahi

khwahish shayari hum itne gareeb nahi

ख़्वाहिश ये नहीं की तारीफ़ हर कोई करे......

कोशिश ये ज़रूर है की कोई बुरा ना कहे.....

Khwahish ye nahin

ये कैसी ख्वाहिश है कि मिटती ही नहीं..

जी भर के तुझे देख लिया फिर भी नजर हटती नहीं..

Ye kaisi khwahish hai

ख्वाहिशें तो मेरी छोटी छोटी थी ,

पूरी न हुई तो बड़ी लगने लगीं 

Meri khwahish poori na hui

ख्वाहिशात जब मर जाती है तो बस..... समझौते बाकी रह जाते हैं

कहने को दिल में तो बहुत से बाते हैं, मुख़्तसर लफ़्ज़ों में मेरी आखरी ख्वाहिश हो तुम 

सुनो तुम्हे सोच सोच कर थक गया हूँ, अब तुम्हें याद आना चाहता हूँ 

हमारे लिए नहीं हामी पर सही, चलो वो आज दिल खोलकर हँसे तो सही 

Aakhri khwahish

मेरे गुनाह मुझे....

मेरे सामने ही गिनवा दो दोस्तों,......

ख़्वाहिश है की ....

जब कफ़न में छुप जाऊँ तो बुरा न कहना...

Mere Gunaah

ख़्वाहिश ये नही की तुम मुझे बेपनाह प्यार करो 

चाहत इतनी है की बस तुम महसूस तो करो ❤

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Bepanah love

मेंरी हर ख्वाहिश पूरी हो गई 

जब से उन्होंने कहा मैं तुम्हारा हू

Meri khwahish

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