Khwahish shayari

Tuesday 22nd of October 2019
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use kishmat smjh kar

use kishmat smjh kar

उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया
था, भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती

Uski khwahish

मेरे टूटने की वजह मेरे जोहरी से पूछो....

उस की ख्वाहिश थी कि मुझे थोडा और

तराशा जाये.!!

khwahish shayari hum itne gareeb nahi

hum itne gareeb nahi

तुम आरजू तो करो मोहब्बत करने की 

हम इतने भी गरीब नहीं की मोहब्बत ना दे सके

Khwahish ye nahin

ख़्वाहिश ये नहीं की तारीफ़ हर कोई करे......

कोशिश ये ज़रूर है की कोई बुरा ना कहे.....

Ye kaisi khwahish hai

ये कैसी ख्वाहिश है कि मिटती ही नहीं..

जी भर के तुझे देख लिया फिर भी नजर हटती नहीं..

Meri khwahish poori na hui

ख्वाहिशें तो मेरी छोटी छोटी थी ,

पूरी न हुई तो बड़ी लगने लगीं 

Aakhri khwahish

ख्वाहिशात जब मर जाती है तो बस..... समझौते बाकी रह जाते हैं

कहने को दिल में तो बहुत से बाते हैं, मुख़्तसर लफ़्ज़ों में मेरी आखरी ख्वाहिश हो तुम 

सुनो तुम्हे सोच सोच कर थक गया हूँ, अब तुम्हें याद आना चाहता हूँ 

हमारे लिए नहीं हामी पर सही, चलो वो आज दिल खोलकर हँसे तो सही 

Mere Gunaah

मेरे गुनाह मुझे....

मेरे सामने ही गिनवा दो दोस्तों,......

ख़्वाहिश है की ....

जब कफ़न में छुप जाऊँ तो बुरा न कहना...

Bepanah love

ख़्वाहिश ये नही की तुम मुझे बेपनाह प्यार करो 

चाहत इतनी है की बस तुम महसूस तो करो ❤

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khwahish shayari meri khwahish

Meri khwahish

मेंरी हर ख्वाहिश पूरी हो गई 

जब से उन्होंने कहा मैं तुम्हारा हू