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नजर पर शायरी

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Mai pee gaya

सवाल जहर का नहीं था,

वो तो मैं पी गया,

तकलीफ लोगों को तब हुई,

जब मैं जीगया.

 

ek waqt tha

ek waqt tha

एक वक्त था ,जब बातें ही खत्म नही होती थी ,

आज सबकुछ खत्म हो गया मगर बात ही नहीं होती

kuch matlab ke liye

कुछ मतलब के लिए ढूँढते हैं मुझको

बिन मतलब जो आए तो क्या बात है

कत्ल कर के तो सब ले जाएँगे दिल मेरा

कोई बातों से ले जाए तो क्या बात है

raat kya dhali

रात क्या ढली सितारे चले गए

गैरों से क्या शिकायत जब हमारे चले गए

जीत सकते थे हम भी इश्क़ की बाज़ी

पर उनको जिताने की धुन में हम हारे चले गए

hum tum se door ho jaaenge

एक दिन हम तुम से दूर हो जायेंगे

अंधेरी गलियों में यूं ही खो जायेंगे

आज हमारी फिक्र नहीं है आपको

कल से हम भी बेफिक्र हो जायेंगे