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jazbaat shayari

juda hoke bhi

जुदा हो कर भी जी रहे है दोनों एक बरसो से 

कभी दोनों कहा करते थे ऐसा हो नहीं सकता 

juda hoke bhi

kuch baat to hai

कुछ बात तो है तेरे बातो में जो बात यहा तक आ पहुची

हम दिल से गए दिल हमसे गया ये बात कहा तक जा पहुंची

kuch baat to hai

hum mar jaaege

तुम्हे ही सहना पड़ेगा गम जुदाई का 

मेरा क्या है मै तो मर जाऊँगा 

hum mar jaaege

wo kagaz aaj bhi

वो कागज आज भी मुझे फूलो की तरह लगता है 

जिसपे तुमने लिखा था मुझे तुमसे मोहब्बत है 

wo kagaz aaj bhi

ksh tu dekh sake

काश तु देख सके मेरी उदासी के वो पल 

कितनी प्यार से तेरी याद मेरी नीद चुरा लेती है

ksh tu dekh sake