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हुस्न शायरी

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raat hoti hai aankho me

जाने उस शख्स को कैसा हुनर आता है 

रात होते ही आँखों में उतर जाता है 

मै उसके खयालो से बच के कहा जाऊ 

वो मेरी हर सोच के रास्ते पे नज़र आता है 

raat hoti hai aankho me

husn ka naaz

हुस्न का naaz अभी और बढ़ेगा शहर मे यारो

दो आशिकों ने एक ही महबूब को चुन लिया है 

husn ka naaz

naaz na ho

वो हुस्न ही क्या जिसे नाज ना हो..

और वो इश्क ही क्या जिसमें आग ना हो

naaz na ho

tere husn ko

तेरे हुस्न को नकाब की जरुरत ही क्या है 

न जाने कौन रहता होगा होश में तुझे देखने के बाद

tere husn ko