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Shero Shayari

Saki ko sikhaaenge

ग़ज़लों का हुनर साकी को सिखायेंगे !
रोएंगे मगर आँसू नहीं आयेंगे !
कह देना समंदर से हम ओस के मोती हैं !
दरिया की तरह तुझसे मिलने नहीं आयेंगे !!

Dil ki baat

खामोशियो से युँ न मुझको सज़ा दो !
दिल की बात को हौले हौले से कह दो !!

Hatho me ho zaam zaroori to nahi

चल पड़ते है कदम जिस तरफ़ तेरी याद मिले !
हर सफ़र का हो कोई मकाम ज़रूरी तो नही !
बगिया लगती है खुबसूरत, हसीन फूलों से !
खुशबू बिखेरे वोह तमाम ज़रूरी तो नही !
बहेकने के लिए तेरा एक खयाल काफी है सनम !
हाथो मे हो फ़िर से कोई जाम ज़रूरी तो नही !!

Mujhe dekhne se pahle

मुझे देखने से पहले साफ़ कर;अपनी आँखों की पुतलियाँ ग़ालिब !
कहीं ढक ना दे मेरी अच्छाइयों को भी;नज़रों की ये गन्दगी तेरी !!

Ab kiske liae lout ke aana chahe

उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे !
वो मेरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे !
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा उसका !
ये मुसाफ़िर तो कोई और ठिकाना चाहे !
एक बनफूल था इस शहर में वो भी न रहा !
कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे !!