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DP Shayari

Gazab ka zulm

gazab ka zulm
गजब का जुल्म ढाया खुदा ने हम दोनों के उपर 
मुझे भरपुर इस्क दे कर तुम्हें बेइन्तहा हुस्न दे कर 

Tumhara husn

tumhara husn
तुम्हारा हुस्न आराइश.तुम्हारी सादगी जेवर
तुम्हें कोई जरूरत ही नहीं बनने-संवरने की

Aaine me wo dekh rahe

aaine me wo dekh rahe
आइने में वो देख रहे थे बहारे हुस्न आया
मेरा ख़्याल तो शर्मा के रह गऐ

Ye husn

ye husn
ये हुस्न-ए-राज़ मुहब्बत छुपा रहा है कोई है
अश्क आँखों में और मुस्कुरा रहा है कोई

Kuch accha hone pe

kuch accha hone pe
कुछ अच्छा होने पे जो इंसान सबसे पहले याद आता है
वो जिंदगी का सबसे कीमती इन्सान होता है