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zindagi ki trah

तू थमी है इन आँखों में यूँ नमी कि तरह !
कि चमक उठे हैं अँधेरे भी रोशनी कि तरह !
तुम्हारा ख़याल है या आसमान नज़रों में !
सिमट गया यूँ जिस्म में ज़िन्दगी की तरह !!