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ye mat kahna

ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा !
मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा !
तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज़ रखे हैं !
तुम्हारी नफरतों की पीड़ को ज़िंदा नहीं रखा !!