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Tera intzaar aaj bhi hai

तुमसे हुई पहली मुलाकात याद है,चलाया था जो कातील नजरों से दिल पे तीर वो घाव के निशा दिल पे आज भी है, ,हालाँकि फिर से एक मिलन की जरूरत तूजसे आज भी है ,धड़काया तुमने कभी दिल को मेरे अपनी मदहोस अदाओ से उसी दिल को तेरे लौट के आने की उम्मीद आज भी है,हालाँकि उसी धड़कनो पे लिखा तेरा नाम आज भी है ,भर के बाहो मे मुझे छुआ था कभी जो तुमने प्यार से ,होठो को मेरे इन गालो पे तेरे लबो के निशा आज भी है ,हालाँकि मेरे लबो को फिर एक बार तेरे होंठों कि प्यास आज भी है,तुझे मुझसे मोहब्बत थी या नहीं इस बात कि उलझन दिल मे आज भी है, हालाँकि मुझे तुमसे मोहब्बत कल से भी बेहद ज्यादा आज भी है,चाहे कितने भी तूफा क्यों ना आ के चल बसे सीने पे मेरे पर दिल मे तेरे कदमों के निशा आज भी है, हालाँकि मुझे उसी कदमों की जरूरत फिर से एक बार आज भी है,तू मुझे चाहे या भूल जाएँ पर तू दिल की चाहत आज भी हे, चाहे कितना भी जमाना खीलाफ क्यों ना हो मेरे, हालाँकि मुझे तेरी जरूरत आज भी है,चाह के भी तुझे हम भूल ना पाएँगे तेरीयादों मे रो रो के एक दिन मर जाएँगे, खोने को तो क्या कुछ नहीं खोया इन आँखों ने, पर इन आँखों में जिंदा तेरा चेहरा आज भी हे, हालाँकि उसी आंखों को इंतजार तेरा आज भी है !!   Kavita Kosh कविता कोश

Tera intzaar aaj bhi hai