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इजहार शायरी

apni mohabbat ko

apni mohabbat ko

चलो आज खामोश प्यार को एक नाम दे दे 

अपनी मोहब्बत को एक प्यारा इंजाम देदे 

इससे पहले की कही रूठ ना जाए मौसम 

अपने धडकते हुए अरमानों को सुरमई शाम दे दे 

mohabbat ka izhaar nahi karte

mohabbat ka izhaar nahi karte

अच्छा करते है वो लोग जो मोहब्बत का इज़हार नहीं करते 

ख़ामुशी से मर जाते है मगर किसी को बदनाम नहीं करते !!

apni mohabbat

apni mohabbat

मैं अपनी मुहब्बत का शिकवा तुमसे कैसे करुं,

मुहब्बत तो हमने की हैं तुम तो बेकसूर हो !!

apni mohabbat

apni mohabbat

बेशक तू बदल ले अपनी मौहब्बत लेकिन ये याद रखना !

तेरे हर झूठ को सच मेरे सिवा कोई नही समझ सकता !!

mohabbat ka izhaar

mohabbat ka izhaar

जिस्म से होने वाली मुहब्बत का इज़हार आसान होता है !

रुह से हुई मुहब्बत को समझाने में ज़िन्दगी गुज़र जाती है !!