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Shor ki es bhid me

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शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई-सी तुम !
ज़िन्दगी है धूप, तो मदमस्त पुरवाई-सी तुम !
लाओ वो तस्वीर जिसमें प्यार से बैठे हैं हम !
मैं हूं कुछ सहमा हुआ-सा, और शरमाई-सी तुम !!