kavita kosh in hindi smundar sare

समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

हक़ीक़त सारे ख़्वाब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस ख़ुदा ही जानता है !

दिल अगर बेनक़ाब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

थी ख़ामोशी हमारी फितरत में तभी तो बरसो निभ गयी लोगो से !

अगर मुँह में हमारे जवाब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

हम तो अच्छे थे पर लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे !

कहीं हम सच में ख़राब होते तो सोचो कितना बवाल होता !!

Kavita Kosh कविता कोश

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