kavita kosh in hindi

आँखें ताज़ा मंज़रों में खो तो जाएंगी मगर

दिल पुराने मौसमों को ढूंढ़ता रह जायेगा

सुनते हैं के मिल जाती है हर चीज़ दुआ से

इक रोज़ तुम्हें माँग के देखेंगे ख़ुदा से

दुनिया भी मिली है ग़म-ए-दुनिया भी मिला है

वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था ख़ुदा से

ऐ दिल तू उन्हें देख के कुछ ऐसे तड़पना

आ जाये हँसी उनको जो बैठे हैं ख़फ़ा से

जब कुछ ना मिला हाथ दुआओं को उठा कर

फिर हाथ उठाने ही पड़े हमको दुआ से

आईने में वो अपनी अदा देख रहे हैं

मर जाए की जी जाए कोई उनकी बला से

तुम सामने बैठे हो तो है कैफ़ की बारिश

वो दिन भी थे जब आग बरसती थी घटा से !!

Kavita Kosh कविता कोश

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