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Hoke mauoosh naa yun sham ki trah

होके मायूस ना यूँ शाम की तरह ढलते रहिये !
ज़िंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये !
ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे !
धीरे धीरे ही सही मगर राह पे चलते रहिये !!
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