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Duaa mangi thi

दुआ मांगी थी आशियाने की चल पड़ी आधियाँ 

जमाने की मेरे गम को कोई समझ नहीं पाया 

क्युकी मेरी आदत थी मुश्कुराने की !!

duaa mangi thi