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chirag hoon

रेत की प्यास को बस बदलियां समझती है !
भूख कितनी लगी है, पसलियां समझती है !
चराग हूँ मुझे सूरज की आग क्या जाने !
मेरी ताकत तो सिर्फ आंधियां समझती है !!