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Bina bole samajh jati hoon mai

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हम भी है कुछ अधूरे से तेरे बिना !

इतना की अलफ़ाज़ में नही बोल सकते !

बिना बोले समझ जाती है तू मुझे !

इसी सुकून से जी रहा हु आज भी यहा !!