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azib phitrat hai smundar ki

हथेली पर रखकर, नसीब अपना !
क्यूँ हर शख्स, मुकद्दर ढूँढ़ता है !
अजीब फ़ितरत है, उस समुन्दर की !
जो टकराने के लिए, पत्थर ढूँढ़ता है !!