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abhi is trah naa nigah kar

अभी इस तरफ़ ना निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ !
मिरा लफ़्ज़ लफ़्ज़ हो आईना तुझे आईने में उतार लूँ !!