www.poetrytadka.com

zuba pe lane ka gi chahta hai

तेरी सादगी को निहारने का दिल करता हैं !
तमाम उम्र तेरे नाम करने का दिल करता है !
एक मुकम्मल शायरी हैं तू कुदरत की !
तुजे ग़ज़ल बनाके जुबान पे लाने का दिल करता है !!