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zindagi roz hi sirf humko aazmati hai

ज़िन्दगी रोज़ ही सिर्फ़ हमको आज़माती है !
गुलों से ख़ार तक हमको खींच ले --जाती है !
क़तरे क़तरे में इन अश्क़ों के,अक़्स तेरा है !
इसी बहाने सही वो रोज़ पास -----आती है !!