mausam shayari

bahut nazar andaz karne lage ho

Bahut nazar andaz karne lage ho

बहुत नज़र अंदाज़ करने लगे हो मुझे, बाज आ जाओ वरना इन्ही नज़रों से ढूढ़ते रह जाओ गे

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tum they to

Tum they to

तुम थे तो कहीं वक़्त थराता हे नहीं था, अब वक़्त गुजरने में बहुत वक़्त लगता है 

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ye shardi

Ye shardi

लिपट जाओ मेरी बाँहों में की शाम दिसम्बर है, ये शर्दी कहीं तुमको बीमार न करदे 

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mausam shayari

Mausam badal raha hai

मौसम बदल रहा है अपना ख्याल रखना दोस्त, क्योंकि बदलते मौसम और बदलते लोगो बहुत तकलीफ देते हैं 

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mausam sayari

Mausam Sayari

तब्दीली जब भी आती है मौसम की अदाओ मे...
किसी का यूं बदल जाना याद आता है....

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