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samajh naa paao ge

samajh naa paao ge
कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे !
मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे !
कोई जब पूछ बैठेगा ख़ामोशी का सबब तुमसे !
बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा ना पाओगे !!