www.poetrytadka.com

raat ki ghrai aankho me

रात की गहराई आँखों में उतर आई !
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई !
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के !
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई !!