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pta nahi rab ne kis mitti se

सर्द रातों मे जगकर हर पल तुम्हें याद करते रहे !
दुआओ मे , ईबादत मे , तेरे लिए फरीयाद करते रहे !
पर इतने दुआओ का न तुझपे असर कोई आया था !
पता नही किस मिट्टी से , रब ने तुझे बनाया था !!