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Poetry on moorat teri

दिल के मंदिर में सजा़ रखी है मूरत तेरी !

मेरे जीने की तो सूरत है ये सूरत तेरी !

रात दिन साथ रहो.सीने में धड़कन की तरह !

आओ मिल जाऐं हम सुगंध और सुमन की तरह !

एक हो जाऐं चलो जान और बदन की तरह !!

poetry on moorat teri