nayi subah shayari

nayi subah shayari

सुबह बनने के लिए हर शाम को ढ़लना होता है
मोती बनने के लिए बर्फ को पिघलना होता है
हाथ पर हाथ धर कर ही बैठे मत रहो तुम
मंजिल पाने के लिए हर इंसान को चलना होता है

subha huwi to aankhen aise neend se bujal thi
jaise koi jaag raha tha mujh main saari raat
सुभा हुइ तो आँखें ऐसे नींद से बजल थी
जैसे कोई जाग रहा था मुझ मैं सारी रात

kash koi aysi subha mile muqaddar main
aankh jo khule teri chidiyon ki chan chan se
काश कोई एसी सुभा मिले मुकद्दर मैं
आँख जो खुले तेरी चिडीयों की छन छन से

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