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naa hum rhe dil lgane ke qabil

ना हम रहे दिल लगाने के क़ाबिल !
ना दिल रहा गम उठाने के क़ाबिल !
लगा उसकी यादों से जो ज़ख़्म दिल पर !
ना छोड़ा उस ने मुस्कुराने के क़ाबिल !!