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mohabbat ka irada badal jana bhi mushkil hai

मोहब्बत का इरादा बदल जाना बी मुश्किल है

उन्हें खोना बी मुश्किल है और पाना बी मुश्किल है

ज़रा सी बात पर आंखें भिगो कर बैठ जाते है वो

उसे तो अपने दिल का हाल बताना बी मुश्किल है

यहाँ लोगो ने खुद पर इतने परदे दाल रखे है

किसी के दिल में क्या है नज़र आना बी मुश्किल है

मन के ख्वाब में मुलाक़ात होगी उनसे

पर यहाँ तो उसके बिना नींद आना बी मुश्किल है

औरो से क्या गिला अब तो आलम ये हे “हाल -ए- ज़िन्दगी ” खुद को समझाना बी मुश्किल है

इस मुश्किल में जो साथ दे मेरा अब उस हम सफ़र को धुंध पाना बी मुश्किल है