khawab shayari on facebook

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मेरी सरगोशियां जब खामोशियाँ बन जाएं
मेरी तनहाइयाँ तेरी मजबूरिया न बन जाएं

thudi si jagah mangi thi dil main iske musafiron ki tarah
isne to tanhai main pura saher mere naam kr diya
थोडी सी जगह माँगी थी दिल मैं इसके मुसाफिरों की तरह
इसने तो तन्हाई मैं पूरा शहर मेरे नाम कर दिया

mana ke khud chal kar aaye hai teri dehliz par hum
sitam sitam aur sitam ye jaha ka insaaf hai
मन के खुद चल कर आये है तेरी दहलीज पर हम
सितम सितम और सितम ये जहा का इन्साफ है

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