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hatho me ho zaam zaroori to nahi

चल पड़ते है कदम जिस तरफ़ तेरी याद मिले !
हर सफ़र का हो कोई मकाम ज़रूरी तो नही !
बगिया लगती है खुबसूरत, हसीन फूलों से !
खुशबू बिखेरे वोह तमाम ज़रूरी तो नही !
बहेकने के लिए तेरा एक खयाल काफी है सनम !
हाथो मे हो फ़िर से कोई जाम ज़रूरी तो नही !!