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duniya ki nigahe

दुनिया की निगाहे अब, हम तक ना पहुँच पाये !
तारों में बसे चलकर, धरती में उतर जाये !
अपनी हैं वही साँसे, जो साथ गुजर जाये !
पास आओ के सीनों के कुछ ज़ख्म तो भर जाये !!

हिन्दी शायरी