www.poetrytadka.com

bekhre bekhre hai halaat

आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात !
मैं ने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं !
जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा !
बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं !!