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badhte rahe manzil ki aur

क्यों डरें कि ज़िंदगी में क्या होगा !

हर वक़्त क्यों सोचें कि बुरा होगा !

बढ़ते रहें मंज़िलों की ओर हम !

कुछ ना भी मिला तो क्या तज़ुर्बा तो नया होगा !!