सुप्रभात शायरी


subah hui to bujha diya

subah hui to bujha diya

उन्होनें भी हमें बस एक दिए की तरह समझा

रात गहरी हुयी तो जला दिया सुबह हुयी तो बुझा दिया

ye mat sochna

ye mat sochna

ये मत सोचना की तुमने छोड़  दिया तो टूट  गए हम

वो भी जी रहे हैं जिनको तेरी खातिर  छोड़ा था हमने

kaise hifazat karta

kaise hifazat karta

मैं चिरागों की भला कैसे हिफाज़त करता

वक़्त सूरज को भी, हर रोज़ बुझा देता है

kehne ko zindagi

kehne ko zindagi

कहने को ज़िन्दगी है मगर इसमें ज़िन्दगी वाली बात नही

भीड़ में शामिल हर कोई है, पर कोई किसी के साथ नही

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chalo accha huaa

chalo accha huaa

चलो अच्छा हुआ भ्रम टूट गया मेरा..

बहुत उम्मीदें लगा ली थी मैंने मोहब्बत से उनकी

bahut haseen

bahut haseen

बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों की मगर,

वो ज़िंदगी है जो काँटों के दरमियाँ गुज़रे।

man ka koi kona

man ka koi kona

मन का कोई कोना अन्धेरे में ना रहे

एक चिराग़ भीतर भी जलाओ यारों

mubarak ho aapko

Mubarak ho aapko

सुप्रभात शायरी
नयी सी सुबह, नया सा सवेरा … सूरज की किरणों मैं हवाओ का बसेरा .. खुले आसमान मैं सूरज का चेहरा …. मुबारक हो आपको ये हसीं सवेरा “सुप्रभात

paigam shayari

Paigam shayari

सुप्रभात शायरी
फूलों ने अमृत का जाम भेजा हैं… सूरज ने गगन से सलाम भेजा हैं… मुबारक हो आपको नयी सुबह ….. तहे दिल से हमने ये पैगाम भेजा हैं … “सुप्रभात Paigam shayari

teri chahat karun

Teri chahat karun

सुबह शाम तेरी चाहत करूँ , तुझसे ना कभी कोई शिकायत करूँ, तेरे हसीं लबों पे यूं ही मुस्कान बरक़रार रहे सदा, मुझमे समाये रहो मेरी धड़कन बनकर, चाहकर भी तुझको खुद से जुदा ना करूँ ॥ ” सुप्रभात “