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Zami pe rukti nahi

हौश मे हूँ मैं, फिर भी कहीं दिखती नही !

परछाई तेरी क्या, जमीं पर रुकती नही !

कोई तो है, जो मुझे भी याद करता है !

दिन-रात आती है, हिचकिया रुकती नही !!

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