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wzah btaya kar

रुठने का हक हैं तुझे, वजह बताया कर !
खफा होना गलत नहीं, तू खता बताया कर !
सीधासाधा जुर्म नहीं, गुनाह-ए-इश्क हुआ है !
आजमा मुझे यूँ भी कभी, तू सजा बताया कर !!