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tere ishq ki tarif

मेरे अल्फ़ाज़ झगड़ पड़े है !
तुम्हारे इश्क़ की तारीफ के खातिर !
कोई कह रहा है तुम्हे चाँद लिखूँ !
तो कोई कह रहा है तुम्हे सारी कायनात लिखूँ !!