जिन्दगी का सबसे बड़ा रहस्य यह है की
हम जानते है कि हम किसके लिए जी रहे है
लेकिनये कभी नहीं जान पाते
कि हमारे लिए कौन जी रहा हैं
चलता रहुगा पथ पर चलने में माहिर बन जाऊँगा
या तो मंजिल मिल जायेगी या अच्छा मुसाफिर बन जाऊँगा
झूझती रही
बिखरती रही
टूटती रही
कुछ इस तरह
ज़िन्दगी निखरती रही
मै मेरी सारी ज़िन्दगी तुम्हारे नाम कर दू
बस कुछ देर सीने से लगालो मुझे
तेरी धड़कन ही ज़िंदगी का किस्सा है मेरा
तू ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा है मेरा
मेरी मोहब्बत तुझसे सिर्फ़ लफ्जों की नहीं है
तेरी रूह से रूह तक का रिश्ता है मेरा
कैसे कहें कि ज़िंदगी क्या देती है;
हर कदम पे ये दगा देती है;
जिनकी जान से भी ज्यादा कीमत हो दिल में;
उन्ही से दूर रहने की सज़ा देती है।
रोक कर बैठा हूँ ज़िन्दगी को कि तुम आओगी तो जीना शुरू कर देगे
जिंदगी में बेशक हर मौके का फायदा उठाओ
मगर किसी के हालात और मजबूरी का नही
हमें कहाँ मालुम थे इश्क़ के मायने हज़ूर
बस वो मिली और जिंदगी मोहब्बत बन गयी
जाने क्यूँ अधुरी-सी लगती है जिन्दगी
जैसे खुद को किसी के पास भूल आये हो
मोहब्बत में लाखों ज़ख्म खाए हमने
अफ़सोस उन्हें हम पर ऐतबार नहीं
मत पूछो क्या गुजरती है दिल पर
जब वो कहते है हमें तुमसे प्यार नहीं
इन हसरतों को इतना भी क़ैद में न रख ए-ज़िंदगी
ये दिल भी थक चुका है इनकी ज़मानत कराते कराते
कोई दुश्मनी नही ज़िन्दगी से
मेरी बस ज़िद्द है तेरे साथ जीना है
जब यकीन टूट जाये तो हर रिश्ता बेमानी सा लगता है
और जब उम्मीद छूट जाये तो जीना बेकार सा लगता है
में भी मुसाफिर हूँ तेरी कश्ती का ए ज़िन्दगी
तू जहा मुझसे कहेगी में वही उतर जाऊंगा
तुम जिंदगी से जीते नही पर लड़े तो थे !
ये बात कम नही की तुम जिद्द पर अड़े तो थे !
ये गम रहेगा हम को बचा ना सके तुम्हें !
वरना हमे बचाने वहां तुम खड़े तो थे !!
जो जितना दूर होता है नज़रो से
उतना ही वो दिल के पास होता है !
मुस्किल से भी जिसकी एक ज़लक देखने को ना मिले !
वही ज़िंदगी मे सबसे ख़ास होता है !!
ज़िंदगी चाहे एक दिन की हो या चाहे चार दिन की !
उसे ऐसे जियो जैसे कि ज़िंदगी तुम्हें नहीं मिली, ज़िंदगी को तुम मिले हो !!
तेरी याद से शुरू होती है मेरी हर सुबह !फिर ये कैसे कह दूँ.. कि मेरा दिन खराब है !!
ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही ख़्वाहिशों का है,दोस्तों !
ना तो किसी को ग़म चाहिए और ना ही किसी को कम चाहिए !!
जिंदगी कुछ नहीं बस एक तलब बनकर रह गयी !
न जाने कब अनगिनत टुकडों में बट कर रह गयी !!
जिन्दगी जख्मो से भरी हैं; वक़्त को मरहम बनाना सिख लें !हारना तो है मोतके सामने; फ़िलहाल जिन्दगी से जीना सिख लें !!
ज़िन्दगी में कुछ खोना पड़े तो यह दो लाइन याद रखना !जो खोया है उसका ग़म नहीं लेकिन जो पाया है वो किसी से कम नहीं !जो नहीं है वो एक खवाब हैं; और जो है वो लाजवाब है!!
मुझे मालूम है कि ये ख्वाब झूठे हैं और ख्वाहिशें अधूरी हैं !मगर जिंदा रहने के लिए कुछ गलतफहमियां भी जरूरी हैं !!
हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली !
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली !
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ !
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव-छाँव चली !!
तमाम उम्र ज़िंदगी से दूर रहे !
तेरी ख़ुशी के लिए तुझसे दूर रहे !
अब इस से बढ़कर वफ़ा की सज़ा क्या होगी !
कि तेरे होकर भी तुझसे दूर रहे !!
गलतफहमी में जिंदगी गुजार दी !
कभी हम नहीं समझे कभी तुम नहीं समझे !!
ज़िंदगी में लोग दर्द के सिवा दे भी क्या सकते हैं !
मरने के बाद दो गज़ कफ़न देते हैं वो भी रो रो कर !!
जिन्दगी तेरी भी, अजब परिभाषा है !सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है !!
ज़िन्दगी के हाथ नहीं होते लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं जो पूरी उम्र याद रहता है !!
मेरी बरबादी के जश्न में तू भी शरीक होगी !
ऐ जिन्दगी....तुम से तो ये उम्मीद न थी !!
मत सोचो इतना जिन्दगी के बारे मै !जिसने जिन्दगी दी है,,ऊशी ने भी तो कुछ सोचा होगा !!
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उँगलियाँ !
जिनकी औकात नही होती हमे छूने की !!
ना जाने कौन सी बात आखरी होगी !
ना जाने कौन सी रात आखरी होगी !
करनी हैं तो कर लो जी भरकर बाते !
ना जाने हमारी कौन सी सास आखरी होगी !!
जिन्दगी हसीन है जिन्दगी से प्यार करो !
है रात तो सुबह का इतजार करो !
वो पल भी आऐगा जिसका इतजार हैं आप को !
रब पर भरोसा और वक्त पे ऐतबार रखो !!
जिन्दगी पर बस इतना ,लिख पाया हूँ मैं !
बहुत मजबूत रिश्ते थे कुछ,“कमजोर” लोगों से !!
आदत नहीं थी मुस्कुराने की मुझे, बे मोल थी जिंदगी !
पर जब से तुमने लबो पे मेरे हंसी दी अनमोल हो गई है कीमत मेरी !!
किसे बताऊँ कि गुज़री है ज़िंदगी कैसे !
जहां में कोई भी भाया, तो तेरी याद आयी !!
कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना हैं !
जीवन का मतलब तो, आना और जाना हैं !
दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी हैं !
जिन्दगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी हैं !!
जो बेटी सिर झुका कर चलती है !
उसके वालिद का सिर कभी नहीं झुकता !!
पुछा हाल शहर का तो सर झुका के बोले
लोग तो ज़िंदा हैं जमीरों का पता नहीं !!
गुज़र जाने दे इस ज़िन्दगी को गिरते पत्तों की तरह !
यूँ पल-पल मरना भी किसी सज़ा से कम नहीं होता !!