सुप्रभात शायरी

सुप्रभात | suprabhat shayari, subah ki shayari, सुबह की शायरी, सुप्रभात शायरी

subah sham teri chahat

Subah sham teri chahat

सुबह शाम तेरी चाहत करूँ , तुझसे ना कभी कोई शिकायत करूँ, तेरे हसीं लबों पे यूं ही मुस्कान बरक़रार रहे सदा, मुझमे समाये रहो मेरी धड़कन बनकर, चाहकर भी तुझको खुद से जुदा ना करूँ ॥ ” सुप्रभात “

raat gujari

Raat gujari

रात गुजारी फिर महकती सुबह आई … दिल धड़का फिर तुम्हारी याद आई.. आँखों ने महसूस किया उस हवा को … जो तुम्हें छु कर हमारे पास आई .. “सुप्रभात “all frined

har subah

Har subah

सुप्रभात - हर सुबह की धुप कुछ याद दिलाती हैं..  हर फूल की खुशबू एक जादू जगाती हैं… चाहू ना…. चाहू कितना भी यार… सुबह सुबह आपकी याद आ ही जाती हैं ..  “

subh din

Subh din

आप नहीं होते तो हम खो गए होते… अपनी ज़िन्दगी से रुसवा हो गए होते… ये तो आपको “गसुप्रभात” कहने के लिए उठें हैं … वर्ना हम तो अभी तक सो रहे होते …. “शुभ दिन “

subah subah aapko

Subah subah aapko

सुबह-सुबह आपको एक पैगाम देना है, आपको सुबह का पहला सलाम देना है, गुज़रे सारा दिन आपका ख़ुशी ख़ुशी, आपकी सुबह को खूबसूरत सा नाम देना है।