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शायरी संसार

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aavaz di mujhe

मुद्दत के बाद उसने जो आवाज़ दी मुझे
कदमों की क्या बिसात थी सांसें ठहर गयी

zamane ki kya aukat

खुदा ने लिखा ही नही तेरा मेरा साथ
वरना ज़माने की क्या औकात की हमें जुदा करदे.

numaish karne se

नुमाइश करने से चाहत बढ़ नही जाती
मुहब्बत वो भी करते है जो इज़हार तक नही करते

sab sath chaklne lge

सांस चल रही थी,अकेला चल रहा था
सांस रुक गई तो,सब साथ चल रहे थे

koi nahi tha

कोई नहीं था और ना ही कोई होगा
तुमसे करीब मेरे दिल के तुम ही रहोगे