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Aukat nahi thi zamane mein

aukat nahi thi zamane mein

औक़ात नही थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके ,

कबख़्त इश्क में क्या गिरे, मुफ़्त में नीलाम हो गए

Aap ke bina

aap ke bina

थोड़ा सा इश्क भेज दो ना..कसम से 

दिल में अकेलापन सा लग रहा है आपके बिना

Kabhi sath to baitho

kabhi sath to baitho

कभी साथ बैठो तो कहूँ की क्या हालात है मेरे 

अब तुम दूर से पूछोगे तो सब बढ़िया ही कहूँगा

Meri aankho me padh lete

meri aankho me padh lete

मेरी आँखों में पढ़ लेते हैं, लोग तेरे इश्क़ की आयतें

किसी में इतना भी बस जाना अच्छा नहीं होता

Nahi hai mohabbat

nahi hai mohabbat

ये बात और है कि इज़हार ना कर सकेँ

नहीँ है तुम से मोहब्बत..भला ये कौन कहता है