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Friday 18th of October 2019

es raat so jaae do

शख्सियत को अपनी गुम जाने दो
वक्त को भी थोड़ा बदल जाने दो
तपती धूप सी कठोर है यह जिंदगी
प्यारी यादों की शाम को ढल जाने दो
दूरियां जो दिलों में बस रही है
आंखों की नदियों में बह जाने दो
बहुत संभले हो दिनभर झूठा मूठा
अब खुद को थोड़ा सच में टूट जाने दो
आओ बातें कुछ करके कुछ दिल की
थोड़ी देर तो यह दुनिया भूल जाने दो
कल सुबह फिर वही दौड़ धूप है
इस रात तो सुकून से सो जाने दो
© pallavi gupta

umeed abhi baki hai

उम्मीद अभी जिन्दा है संघर्ष अभी बाकी है
तूफां आके चला गया,उत्कर्ष अभी बाकी है
न्याय की उम्मीद मे,हर आह ने दम है भरा
झूठ ने सच को ढका,निष्कर्ष अभी बाकी है
अज्ञान के तिमिर मे,ज्ञानेश ' कही खो गया
जुगनुओ की रोशनी का,अंश अभी बाकी है
तेरी चेहरे की परछाई मेरे आँखो से छटती नहीं
तेरी आने की आहट मेरे कानों से हटती नहीं
या खुदा....या खुदा
ये कैसा इश्क का कैफ है पिता हुँ तो चढ़ती नहीं देखता हुँ तो उतरती नहीं
© pallavi gupta