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Mast

Badnam mohabbat

क्यों कतरा कतरा बीते दिन क्यों कतरा कतरा बीती शाम
दिन मेरे अधूरे से रहे रहा लबों पर बस तेरा नाम
क्यों धीमी-धीमी जली रोशनी क्यों फीके-कीके लगे जाम
महफिले तो सजी दुनिया की पर याद आई तेरी यादें तमाम
क्यों हिस्सा हिस्सा जुड़ रहा क्यों किस्सा यह लगे आम
मोहब्बत की गलियों में रब मिले फिर भी हम हो रहे बदनाम
यूँ कतरा कतरा बीते दिन यूँ कतरा कतरा बीती शाम
दिन मेरे अधूरे से रहे रहा लबों पर बस तेरा नाम
© pallavi gupta

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Ek dard hai

इक दर्द हैं इन दुआओं में वजह इश्क तेरा मेरा
कि पत्थर को तरासते हुए हाथ भी जख्मी होते है कभी
इक कर्द है इन निगाहो में वजह इश्क तेरा मेरा
कि पलकों से जुदा होते हुए ऑंखे भी रोती है कभी
इक सर्द है इन हवाओं में वजह इश्क तेरा मेरा
कि मस्त मगन में होते हुए दर वदर भटकती है ये भी कभी
इक इश्क के ये अहसास में गुजरता है वक्त तेरा मेरा
कि सजदों में नाम होते हुए वजूद होते है अधूरे अब भी कभी
© pallavi gupta

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Rab ne jab takdeer likhi

रब ने जब तकदीर लिखी उसने भी एक तस्वीर चुनी
रंग उसमें फिर तय किए जिन पलों को हमने है जिए
सुर्ख लाल से प्यार भरा खुशहाली लाता है हरा
चटक चमकता पीला रंग लगता अच्छा सबके संग
नीले ने गहराई चुनी काले ने तन्हाई चुनी
भगवा रंग लाए बहार इसके बिन जीवन बेकार
श्वेत कागज सा अपना यह मन चुनलों उसको रहना जिसके संग
सब रंगों का रखना मेल इन रंगों का है यही खेल
© pallavi gupta

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Mast 2022.

Aaj dil udas hai

आज दिल उदास है कुछ चेहरे हैं जिनको देखने की आस है
वो जो मेरे दिल के पास है जिनके दिलों में मेरा एहसास है
आज फिर दिल उदास है © pallavi gupta

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Tu hi tu kar maula

तपकर बनता है हीरा जलकर बनता है राख
तू ही तय कर मौला मेरे चमकू या बन जाऊं राख
© pallavi gupta

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