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badnam mohabbat

क्यों कतरा कतरा बीते दिन क्यों कतरा कतरा बीती शाम
दिन मेरे अधूरे से रहे रहा लबों पर बस तेरा नाम
क्यों धीमी-धीमी जली रोशनी क्यों फीके-कीके लगे जाम
महफिले तो सजी दुनिया की पर याद आई तेरी यादें तमाम
क्यों हिस्सा हिस्सा जुड़ रहा क्यों किस्सा यह लगे आम
मोहब्बत की गलियों में रब मिले फिर भी हम हो रहे बदनाम
यूँ कतरा कतरा बीते दिन यूँ कतरा कतरा बीती शाम
दिन मेरे अधूरे से रहे रहा लबों पर बस तेरा नाम
© pallavi gupta

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ek dard hai

इक दर्द हैं इन दुआओं में वजह इश्क तेरा मेरा
कि पत्थर को तरासते हुए हाथ भी जख्मी होते है कभी
इक कर्द है इन निगाहो में वजह इश्क तेरा मेरा
कि पलकों से जुदा होते हुए ऑंखे भी रोती है कभी
इक सर्द है इन हवाओं में वजह इश्क तेरा मेरा
कि मस्त मगन में होते हुए दर वदर भटकती है ये भी कभी
इक इश्क के ये अहसास में गुजरता है वक्त तेरा मेरा
कि सजदों में नाम होते हुए वजूद होते है अधूरे अब भी कभी
© pallavi gupta

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rab ne jab takdeer likhi

रब ने जब तकदीर लिखी उसने भी एक तस्वीर चुनी
रंग उसमें फिर तय किए जिन पलों को हमने है जिए
सुर्ख लाल से प्यार भरा खुशहाली लाता है हरा
चटक चमकता पीला रंग लगता अच्छा सबके संग
नीले ने गहराई चुनी काले ने तन्हाई चुनी
भगवा रंग लाए बहार इसके बिन जीवन बेकार
श्वेत कागज सा अपना यह मन चुनलों उसको रहना जिसके संग
सब रंगों का रखना मेल इन रंगों का है यही खेल
© pallavi gupta

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aaj dil udas hai

आज दिल उदास है कुछ चेहरे हैं जिनको देखने की आस है
वो जो मेरे दिल के पास है जिनके दिलों में मेरा एहसास है
आज फिर दिल उदास है © pallavi gupta

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tu hi tu kar maula

तपकर बनता है हीरा जलकर बनता है राख
तू ही तय कर मौला मेरे चमकू या बन जाऊं राख
© pallavi gupta

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dil saath mera le jao

तुम जो जा रहे हो दिल साथ मेरा ले जा रहे हो तकूंगी अब मैं राह तुम्हारी
राहत मेरी जो ले जा रहे हो कैसे देखूंगी अब सपना में
नींदें मेरी जो ले जा रहे हो गुजरेंगे दिन अब तन्हा मेरे
यादें इतनी जो दे जा रहे हो तुम जो जा रहे हो दिल साथ मेरा भी ले जा रहे हो
© pallavi gupta

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hai kaisi paheli

खूब खेले वो आंख मिचोली ढुंढती उसे जब रहूँ अकेली
कभी दुख कभी सुख तू है कैसी पहेली
धूप-छांव सी जिंदगी मेरी सहेली
© pallavi gupta

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chalo chalte hai wha

चलो चलते हैं वहां जहां मुकद्दरों का हिसाब होगा
कौन था कितने के काबिल वहां सारा इंसाफ होगा
तू भी वंदा, मैं भी नमाजी दिल किसका कितना साफ होगा
कर्मों के बिनाफ पे ए-काफिर वहां सारा इंसाफ होगा
दिखता सब है रब को मेरे वहां न कोई पर्दा होगा
छल फरेब से ऊपर उठके वहां सारा इंसाफ होगा
© pallavi gupta

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dekh tera eka banda

देख तेरा एक बंदा मौला खुद से कैसे लड़ता है
नियत शरीफ है उसकी फिर भी बनता और बिगड़ता है
नाइंसाफीयां हुई है जाने कितने फिर भी सजदा तेरा करता है
देख के उसके धीरज को दिल मेरा भी पिघलता है
दामन में नहीं है उसके कुछ भी फिर भी सपने वह बुनता है
दूसरों के लिए जिए जिंदगी जुनून इतना वो रखता है
बिखरे टूटे टुकड़ों को अपने सहेज के वह चलता है
हर मुश्किल को परे रखकर कदम कदम वह बढ़ता है
देख तेरा एक बंदा मौला खुद से कैसे लड़ता है
सह कर सितम वो तेरे सारे तुझ पर ही मरता है
© pallavi gupta

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ye duniya ka mela

रास ना आया मुझको यह दुनिया का मेला
चले ये दुनिया साथ मेरे फिर भी दिल तन्हा अकेला
पूछें दुनिया मुझसे खुद को कहां मैंने भूला
बोला हंस कर मैंने उनसे यहॉ रिश्तों का है बहुत झमेला
तिल तिल कर मैंने बेमतलब से रिश्तो को झेला
फिर एकदिन खुलकर मैंने खुद से डटकर ये बोला
चलो चले दूर कही जहां न हो इतना मेला
बस एक दो सच्चे साथी हो दिल न करें महसूस अकेला
© pallavi gupta

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