Hindi Shayari : शायरी

soya huaa hai

सोया हुआ है मुझमें कोई शख्स आज रात 

लगता है अपने जिस्म से बाहर खड़ा हूँ मैं.

dhaga hi samajh

धागा ही समझ, तू अपनी "मन्नत" का मुझे 

तेरी दुआओ के मुकम्मल होने का दस्तूर हूँ मैं

ajeeb se hain

इस शहर के अंदाज़ भी अजीब से हैं,

गूँगों से कहा जाता है बहरों को पुकारो.

Aik tum

एक तुम भी ना कितनी जल्दी सो जाते हो…

लगता है इश्क को तुम्हारा पता देना पड़ेगा.!!

marham lga sko

मरहम लगा सको तो किसी गरीब के जख्मो पे लगा देना-हकीम बहुत है बाजार में अमीरों के इलाज के खातिर 

etrane lage hain log

रूबरू होने की तो छोड़िए लोग गुफ्तगू से भी कतराते है 

गुरूर ओढे है रिश्ते अपनी हैसियत पे इतराने लगे है 

bhool kar bhi

भूल कर बोहब्बत की जंगल में ना जाना तुम 

यहा सांप नहीं इन्सान डसते है 

koshish kar raha hoon

कोशिश कर रहा हुँ उसके बगैर जीने की

अगर जी गया तो इतिहास बन जाएगा और मर गया तो लाश

barbad kar deti hai

बरबाद कर देती है मोहब्बत हर मोहब्बत करने वाले को क्यूकि इश्क़ हार नही मानता और दिल बात नही मानता

adhura pyar

जिन्दगी मे प्यार का मतलब वही समझ सकता है जिसका प्यार अधुरा रह गया हो