kavita kosh

Kavita Kosh

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

कुछ इक पल के, कुछ दो पल के

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

कुछ परों से हल्के होते हैं

बरसों के तले चलते चलते

भारी भरकम हो जाते हैं

कुछ भारी भरकम बर्फ़ के से

बर्सों के तले गलते गलते

हलके फ़ुल्के हो जाते हैं

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

नाम होते हैं कुछ रिश्तों के

कुछ रिश्ते नाम के होते हैं

रिश्ता वो अगर मर भी जाए तो

बस नाम से जीना होता है

बस नाम से जीना होता है

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं !!

Kavita Kosh कविता कोश

hindi ghazal kosh

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे

मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे

रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर

ये और बात मेरी ज़िन्दगी वफ़ा न करे

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में

ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे

सुना है उसको मोहब्बत दुआएँ देती है

जो दिल पे चोट तो खाये मगर गिला न करे

ज़माना देख चुका है परख चुका है उसे

'क़तील' जान से जाये पर इल्तिजा न करे !!

Kavita Kosh कविता कोश

kavita kosh ghazal

कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे

तूने आँखों से कोई बात कही हो जैसे

जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे

जान बाकी है मगर साँस रूकी हो जैसे

जानता हूँ आपको सहारे की ज़रूरत नहीं

मैं तो सिर्फ़ साथ देने आया हूँ

हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है

मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे

राह चलते हुए अक्सर ये गुमां होता है

वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे

एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफ़र

ज़िंदगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे

इस तरह पहरों तुझे सोचता रहता हूँ मैं

मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे !!

Kavita Kosh कविता कोश

kavita kosh in hindi

आँखें ताज़ा मंज़रों में खो तो जाएंगी मगर

दिल पुराने मौसमों को ढूंढ़ता रह जायेगा

सुनते हैं के मिल जाती है हर चीज़ दुआ से

इक रोज़ तुम्हें माँग के देखेंगे ख़ुदा से

दुनिया भी मिली है ग़म-ए-दुनिया भी मिला है

वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था ख़ुदा से

ऐ दिल तू उन्हें देख के कुछ ऐसे तड़पना

आ जाये हँसी उनको जो बैठे हैं ख़फ़ा से

जब कुछ ना मिला हाथ दुआओं को उठा कर

फिर हाथ उठाने ही पड़े हमको दुआ से

आईने में वो अपनी अदा देख रहे हैं

मर जाए की जी जाए कोई उनकी बला से

तुम सामने बैठे हो तो है कैफ़ की बारिश

वो दिन भी थे जब आग बरसती थी घटा से !!

Kavita Kosh कविता कोश