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kavita kosh

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Tera intzaar aaj bhi hai

Tera intzaar aaj bhi hai

तुमसे हुई पहली मुलाकात याद है,चलाया था जो कातील नजरों से दिल पे तीर वो घाव के निशा दिल पे आज भी है, ,हालाँकि फिर से एक मिलन की जरूरत तूजसे आज भी है ,धड़काया तुमने कभी दिल को मेरे अपनी मदहोस अदाओ से उसी दिल को तेरे लौट के आने की उम्मीद आज भी है,हालाँकि उसी धड़कनो पे लिखा तेरा नाम आज भी है ,भर के बाहो मे मुझे छुआ था कभी जो तुमने प्यार से ,होठो को मेरे इन गालो पे तेरे लबो के निशा आज भी है ,हालाँकि मेरे लबो को फिर एक बार तेरे होंठों कि प्यास आज भी है,तुझे मुझसे मोहब्बत थी या नहीं इस बात कि उलझन दिल मे आज भी है, हालाँकि मुझे तुमसे मोहब्बत कल से भी बेहद ज्यादा आज भी है,चाहे कितने भी तूफा क्यों ना आ के चल बसे सीने पे मेरे पर दिल मे तेरे कदमों के निशा आज भी है, हालाँकि मुझे उसी कदमों की जरूरत फिर से एक बार आज भी है,तू मुझे चाहे या भूल जाएँ पर तू दिल की चाहत आज भी हे, चाहे कितना भी जमाना खीलाफ क्यों ना हो मेरे, हालाँकि मुझे तेरी जरूरत आज भी है,चाह के भी तुझे हम भूल ना पाएँगे तेरीयादों मे रो रो के एक दिन मर जाएँगे, खोने को तो क्या कुछ नहीं खोया इन आँखों ने, पर इन आँखों में जिंदा तेरा चेहरा आज भी हे, हालाँकि उसी आंखों को इंतजार तेरा आज भी है !!   Kavita Kosh कविता कोश

mujhe gale se lgalo bhut udas hoon mai

mujhe gale se lgalo bhut udas hoon mai

१: मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ मै 

गम-ऐ -जहाँ से से छुपा लो बहुत उदास हूँ मै

नज़र में तीर से चुभते अब नज़रो से 

मै थक गई सभी टूटते शहारो से 

अब और बोझ ना डालो बहुत उदास हूँ मै 

२: बहुत सही गम -ऐ -दुनिया ,मगर मगर उदास न हो 

करीब है शब-ऐ -गम की सहर उदास न हो 

सितम के हाथ की तलवारटूट जाए गी

ये ऊँच नीच की दीवार टूट जाए गी 

तुझे कसम है मेरी हमसफ़र उदास ना हो 

३: ना जाने कब ये तरीका ये तौर बदले गा 

सितम का गम का मुसीबत का दौर बदले गा 

मुझे  जहाँ  से उठा लो बहुत उदास हूँ मैं !!

Kavita Kosh कविता कोश

tum ko dekha to khayal aaya

तुमको देखा तो ये ख़याल आया

ज़िन्दगी धूप, तुम घना साया

आज फ़िर दिल ने इक तमन्ना की,

आज फ़िर दिल को हमने समझाया

तुम चले जाओगे,तो सोचेंगे

हमने क्या खोया, हमने क्या पाया

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते

वक़्त ने ऐसा गीत क्यू गाया

तुमको देखा तो ये ख़याल आया!!

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hans ke bol diya karo

कुछ हँस के बोल दिया करो,

कुछ हँस के टाल दिया करो,

यूँ तो बहुत  परेशानियां है 

तुमको भी मुझको भी,

मगर कुछ फैंसले 

वक्त पे डाल दिया करो,

न जाने कल कोई 

हंसाने वाला मिले न मिले..

इसलिये आज ही 

हसरत निकाल लिया करो !!

Kavita Kosh कविता कोश

hosh me aana bhool gae

देख के तुमको होश में आना भूल गये !

याद रहे तुम, ओर जमाना भूल गये !

जब सामने तुम आ जाते हो !

क्या जानिये क्या हो जाता है !

कुछ मिल जाता है,कुछ खो जाता है!

क्या जानिये क्या हो जाता है !!

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