www.poetrytadka.com

Kavita

Kya hoga kavita kosh

नज़र फ़रेब-ए-कज़ा खा गई तो क्या होगा;

हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा;

नई सहर के बहुत लोग मुंतज़िर हैं मगर;

नई सहर भी कजला गई तो क्या होगा;

न रहनुमाओं की मजलिस में ले चलो मुझको;

मैं बे-अदब हूँ हँसी आ गई तो क्या होगा;

ग़म-ए-हयात से बेशक़ है ख़ुदकुशी आसाँ;

मगर जो मौत भी शर्मा गई तो क्या होगा;

शबाब-ए-लाला-ओ-गुल को पुकारनेवालों;

ख़िज़ाँ-सिरिश्त बहार आ गई तो क्या होगा;

ख़ुशी छीनी है तो ग़म का भी ऐतमाद न कर;

जो रूह ग़म से भी उकता गई तो क्या होगा।

Kavita Kosh कविता कोश

 

Category : Kavita

Ek shabd hai

एक शब्द है ( मोहब्बत )

इसे कर के देखो तुम तड़प ना जाओ तो कहना,

एक शब्द है ( मुकद्दर )

इससे लड़कर देखो तुम हार ना जाओ तो कहना,

एक शब्द है ( वफा )

जमाने में नहीं मिलती कहीं ढूंढ पाओ तो कहना,

एक शब्द है ( आँसू )

दिल में छुपा कर रखो तुम्हारी आँखों से ना निकल जाए तो कहना,

एक शब्द है ( जुदाई )

इसे सह कर तो देखो तुम टूट कर बिखर ना जाओ तो कहना,

एक शब्द है ( ईश्वर )

इसे पुकार कर तो देखो सब कुछ पा ना लो तो कहना

Kavita Kosh कविता कोश

Category : Kavita

Tera Dedar Karoo

तू सामने रहे मेरे, मै तेरा दीदार करू,

सब कुछ भुला के, सिर्फ तुझे ही प्यार करू,

तेरी जुल्फों के साये मे जिन्दगी मिली

तेरी आँखों मे डूब के,ख़ुशी मिली,

तुझ से भी बढ़ कर तुझ पे ऐतबार करू,

तुम न थे दिल मे, कोई अरमान न था,

इस नाकाम जिन्दगी मे,कही मुकाम न था,

सफ़र के हर मोड़ पे,तेरा इन्तेजार करू,

वादा करो मुझ से,कभी दूर न जाओगे,

मेरे दिल को ख़ुशी देकर फिर न रुलाओगे,

मेरे सब कुछ तुम हो, तुझ पे जान निसार करू

Kavita Kosh कविता कोश

Category : Kavita

Kavita 2022.

Kavita kosh in hindi smundar sare

समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

हक़ीक़त सारे ख़्वाब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस ख़ुदा ही जानता है !

दिल अगर बेनक़ाब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

थी ख़ामोशी हमारी फितरत में तभी तो बरसो निभ गयी लोगो से !

अगर मुँह में हमारे जवाब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

हम तो अच्छे थे पर लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे !

कहीं हम सच में ख़राब होते तो सोचो कितना बवाल होता !!

Kavita Kosh कविता कोश

Category : Kavita

Kavita Kosh

बेटी बनकर आई हु माँ-बाप के जीवन में 

बसेरा होगा कल मेरा किसी और के आँगन में

क्यों ये रीत "रब" ने बनाई होगी,

 कहते है आज नहीं तो कल तू पराई होगी,

देके जनम पाल-पोसकर जिसने हमें बड़ा किया

और वक़्त आया तो उन्ही हाथो ने हमें विदा किया

टूट के बिखर जाती हे हमारी ज़िन्दगी वही

पर फिर भी उस बंधन में प्यार मिले ज़रूरी तो नहीं

क्यों रिश्ता हमारा इतना अजीब होता है

क्या बस यही बेटियो का नसीब होता है !!

Kavita Kosh कविता कोश

Category : Kavita